तलत महमूद हमारे प्रिय कलाकार रहे हैं । कल उनकी दसवीं पुण्यतिथि थी । किन्हीं व्यस्तताओं के रहते कल रेडियोवाणी पर तलत की चर्चा नहीं हो सकी । इसलिए एक तरह की बेचैनी थी ।
तलत को सुनना तब शुरू किया था जब हम मध्यप्रदेश के शहर सागर में नौंवी या दसवीं की पढाई कर रहे थे । आपको बता दें कि ये बहुधा ब्लैक एंड व्हाइट टी.वी. का दौर था । और दूरदर्शन पुराने ज़माने की फिल्में खूब दिखाता था । उन दिनों तलत साहब के अभिनय वाली कई फिल्में देखने को मिलीं । लेकिन जिस फिल्म की याद अभी तक है वो है दिल-ए-नादां । ये फिल्म सन 1953 में आई थी । इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक थे अब्दुल रशीद कारदार । तलत इस फिल्म के नायक थे । साथ में थीं श्यामा । शकील बदायूंनी ने इस फिल्म के गीत लिखे थे और संगीतकार थे गुलाम मोहम्मद । ये सारी बातें तो ख़ैर इंटरनेटी खोजबीन और encylopedia से ही प्राप्त की हैं । उस समय ये सब पता नहीं था लेकिन इस फिल्म का एक गीत आंखों में और ज़ेहन में रच बस गया था ।
मुझे याद है कि इस गाने में खुद तलत महमूद पियानो पर बैठे हैं और गाना गा रहे हैं । कमाल का गाना था ये । कुछ दिन तक तो इस गाने को खोजा पर जब नहीं मिला तो इसकी खोज बंद कर दी । कुछ महीनों पहले यू-ट्यूब पर घुमक्कड़ी के दौरान इस गाने का वीडियो मिल गया । उस वक्त इसे डाउनलोड करने की सुध नहीं रही । आज जब इसे दोबारा खोजा तो फिर मिल गया । आप सबकी नज़र ये गीत । एक पुरानी और विकल खोज के नाम, इसे डाउनलोड तो अभी तक नहीं किया है पर अगर आपको ये गीत प्रिय है तो अपने ख़ज़ाने में फ़ौरन रख लीजिए । क्या पता....कब इसकी यू-ट्यूबी खिड़की बंद हो जाए ।
आज तो इस गाने को यूट्यूब से ही चढ़ाया जा रहा है । पर पहली फुरसत में इसे अपने ख़ज़ाने में रखकर अपलोड किया जायेगा ताकि रेडियोवाणी पर ये स्थायी रूप से मौजूद रहे । तो सुनिए और मज़ा लीजिए इस गाने का ।
यहां आपको ये भी बता दें कि तलत तो अपना गाना खुद ही गा रहे हैं । यहां वीडियो में दो नायिकाएं खड़ी दिख रही हैं । इनमें से एक हैं पीस कंवल और दूसरी हैं श्यामा । पीस कंवल को आवाज़ दी है जगजीत कौर ने । और श्यामा को आवाज़ दी है सुधा मल्होत्रा ने । कोशिश करके जगजीत कौर और सुधा मल्होत्रा की आवाज़ की अलग अलग पहचानियेगा ।
मुहब्बत की धुन बेक़रारों से पूछो
ये नग़मा है क्या चांद तारों से पूछो ।।
तुम्हारी ज़बां पे मेरी दास्तां है
तुम्हें ये ख़बर क्या मुहब्बत कहां है
भला क्यों ये दुनिया हसीं है जवां है
तुम अपनी नज़र के इशारों से पूछो ।।
मुहब्बत की धुन ।।
कोई बन खुश्ाबू बसा मेरे मन में
लुटा है मेरा दिल इसी अंजुमन
कली कौन सी खिल रही है चमन में
ये तुम अपने दिल की बहारों से पूछो ।।
इस गाने के बाद तलत के कुछ और वीडियो भी आपकी नज़र । जिन्हें मैं अपने संग्रह के लिए डाउनलोड कर रहा हूं । ये तलत के लाइव शो के वीडियो हैं ।
ये गाना है-'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहां कोई ना हो' । 1950 में आई फिल्म 'आरज़ू' का गीत । जांनिसार अख्तर के बोल हैं और संगीत अनिल विश्वास का । ज़रा देखिए कि तलत कितनी सहजता से गा रहे हैं । आज के स्टेज शो के लटकों-झटकों की तुलना में ये कितना बड़ा 'रिलीफ़' लगता है ।
तलत महमूद की आवाज़ में फिल्म सुजाता का गीत । सन 1959 में आई इस फिल्म के गीतकार थे मजरूह सुल्तानपुरी और संगीतकार थे सचिन देव बर्मन ।
ये गाना है--हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें हम दर्द के सुर में गाते हैं । ये फिल्म पतिता का गीत है । शैलेंद्र । शंकर जयकिशन ।
इस वीडियो की क्वालिटी थोड़ी ख़राब है ।
तलत साहब को गये दस वर्ष हो गये । लेकिन इन गीतों ने हमें उनकी मौजूदगी का लगातार अहसास कराया है । तलत साहब की स्मृति को नमन...
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